25 February 2026

 

श्रीअञ्जनी कुमार की आरती

आरती श्रीअञ्जनी कुमार की,
शिवस्वरूप मारुती नंदन,
केसरी-सुअन कलियुग कुठार की।।

हिय में राम-सीय नित राखत,
मुखसो राम-नाम गुण भाखत,
सुमधुर भक्ति-प्रेम रस चाखत,
मंगलकर मंगलाकार की
आरती श्रीअञ्जनी कुमार की।।

विस्मृत-बल-पौरुष, अतुलित बल,
दहज दनुज-वन हित, दावानल,
ज्ञानी-मुकुट-मणि, पूर्ण गुण सकल,
मंजु-भूमि-शुभ सदाचार की।
आरती श्रीअञ्जनी कुमार की।।

मन-इन्द्रिय विजयी, विशाल मति,
कलानिधान, निपुण गायक अति,
छन्द-व्याकरण-शास्त्र अमित गति,
रामभक्त अतिशय उदार की।
आरती श्रीअञ्जनी कुमार की।।

पावन परम सुभक्ति प्रदायक,
शरणागत को सब सुख दायक ,
विजयी वानर सेना नायक,
सुगति-पोत के कर्णधार की।

आरती श्रीअञ्जनी कुमार की,
शिवस्वरूप मारुती नंदन,
केसरी-सुअन कलियुग कुठार की।।

श्रीरामचन्द्र जी की जय , बजरंगबली की जय

12 January 2024

POTENTIAL to POSSIBILITIES

Having POTENTIAL & to achieve POSSIBILITIES is like a journey of a Point of an ever expending Circle toward its Periphery. The actual is limited, the possibilities immense.

Considering that Point is of white color while Periphery is of red color and in between the two lies DESIRE, ABILITY and TIME to achieve Possibilities from the Potential. Potential is white- Cool in nature , Possibilities are Red- Vibrant in nature.


Till Potential does not meet DESIRE it remain unused and dormant.

Till Potential is not nourished with required ABILITY, Desire alone can not finish the journey.

Desire propels, Ability ensures but its TIME which is actually the limiting factor of this journey. Lack or abundance of Time actually determines the fate of journey.

The right combination of Desire, Ability and Time all three ensures the completion of journey (success).

Absence or scarcity of any or all the 3 factors result in no journey or limitation of journey thus determine success.



Desire works best when its a result of a BELIEF.

Ability can be strengthen after acquiring more required SKILLS.

Time can be taken off from other unimportant task and can be MANAGED for desired journey.



Its important to know that how one can GENERATE BELIEFS, ACQUIRE SKILLS and MANAGE TIME.

Belief can be generated only when there is no doubt and one submit to journey without condition. Beliefs are not fact based trust, its supreme trust which is beyond facts or 'if & but'.

Skills are acquired when one is in the company of able man ( A good teacher or inner conscious act as an able man).

Time can not be produced but definitely managed and allocated for chosen task only. Avoid Multitasking. Indulge in single task at a time.



Actually Desire-in the form of belief, Ability or skills and Time all three are pure ENERGY only. Higher energy ensures greater and longer journey thus bigger periphery of the ever expending circle is covered. It ensure Bigger success. That's the journey of life.

A Human is born as a potential and shall shape its future while exploring the possibilities of his potential.

Happy Journey!!



POINTS to PERIPHERY = POTENTIAL to POSSIBILITIES

DESIRE --> BELIEF --> GENERATE through Submission without Doubt.

ABILITY --> SKILLS --> ACQUIRE through LEARNING.

TIME --> ALLOCATE TIME --> MANAGE through SINGLE TASKING.

Harsch Kumar lall

4 October 2022

सफल मोदिनोमिक्स

 



क्या होता यदि अविकसित/विकासशील भारत भी 1970 के दशक से ही IMF से अपनी GDP का चार गुना तक ऋण लेकर अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास कर लेता?

UK, USA, JAPAN, GERMANY, FRANCE, ITLY इन सभी देशो ने यही किया. उस समय IMF की एक ही शर्त होती थी कि ऋण को चुकाने की पक्की गारंटी चाहिए, भले ही ब्याज देने के लिए नया ऋण ही क्यों न लेना पड़े.
इन तथाकथित विकसित देशो ने IMF से सस्ती दरों पर जमकर ऋण लिया. उस ऋण से नयी नयी कम्पनिया बनाकर आधारभूत ढांचागत सरंचना का निर्माण और औद्योगिक विकास किया. ऋण लेकर बनायीं गयी इन कंपनियों को शेयर बाजार में नामांकित करके ऊँचा लाभ अर्जित किया, जिसे पुनः शेयर बाजार में निवेश कर दिया गया, तदोपरांत परिस्तिथिनुसार ऋण तथा ब्याज IMF को लौटते भी रहे तथा नया ऋण लेते रहे.
ऋण लेकर विकास करने की व्यवस्था का यह प्रतिमान विगत 40-50 वर्षो तक अभूतपूर्व रूप से सफल भी रहा. आज ब्रिटेन के ऊपर उसकी अर्थव्यवस्था से तीन गुना ज्यादा बाहरी कर्ज चढ़ा हुआ है, (ब्रिटेन के ऊपर बाह्य ऋण 9.5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर्स है, जबकि उसकी अर्थव्यवस्था लगभग 3.2 ट्रिलियन डॉलर्स की ही है). वर्तमान में ब्रिटेन का ब्याज देने के लिए लिये हुए ऋण का भुगतान असुंतलन उनकी GDP का 3% तक पहुँच गया है.
सिंगापुर पर बाह्य ऋण का बोझ उनकी GDP का चार गुना यानि 400% से भी ज्यादा है, इसी तरह जापान पर 100%, फ्रांस पर 400%, अमेरिका पर 100%, यूरोपीय यूनियन पर 190% कर्ज का बोझ है.

विकास के लिए चीन द्वारा IMF से ऋण लेकर बनायीं कंपनियों द्वारा शेयर बाजार में निवेश करके धन कमाने से इतर तरीका अपनाया गया. चीन ने बैंको का अधिग्रहण किया और व्यापारिक समूहों को सस्ती दरो पर ऋण देना प्रारम्भ किया, हलाकि बैंको औव्यापारिक प्रतिष्ठानों के मध्य यह अलिखित समझौता था कि ऋण चुकाना नहीं है बल्कि अर्थव्यवस्था को बड़ा करना है ताकि बैंक अपनी ऋण दी हुयी पूँजी बढ़े हुए व्यापार से अर्जित लाभ द्वारा वसूल कर ले. इसलिए चीन की बैंकिंग व्यवस्था जनहितकारी न होकर घोर राष्ट्रवादी है जिसमे व्यक्ति या व्यापारिक समूहों को ऋण राष्ट्रनीति के अंतर्गत दिया जाता है जहाँ व्यक्तिगत लाभ/अचल सम्पति निर्माण का कोई स्थान नहीं है. संभवतः चीन पर आतंरिक ऋण उसकी GDP का 12 गुना यानि 1200% से भी ज्यादा हो सकता है. जबकि खता-बही में चीन का बाह्य ऋण उसकी GDP का लगभग 16%, और कुल ऋण 66% ही है.

चीन का आर्थिक विकास प्रतिमान अनुकरण करने के योग्य ही नहीं है, देर-सबेर इसकी हवा निकलना निश्चित है. वर्तमान में तथाकथित विकसित देशो का ऋण-विकास मॉडल संभव नहीं है क्योकि मंदी, युद्ध, विफल साम्यवाद (पूंजीवाद में निहित साम्यवाद भी), और शेयर बाजार के गिरने से उपजे भुगतान असुंतलन से महंगाई, बेरोजगारी और राजनितिक अस्थिरता का जोखिम उठाना व्यवहारिक नहीं रह गया है.

यदि समय रहते भारत के राजनेता 1970-80 के दशक में इस दौड़ में कूद पड़ते और आज भारत के ऊपर भी अमेरीका, जापान जितना ही ऋण होता तो भारत एक अतिविकसित देश बन चुका होता. भारत में तमाम वो सुविधाएं और अधोसरंचना उपलब्ध होती जो आज जापान, अमेरिका, ब्रिटेन आदी देशो में है. देश से गरीबी दूर हो चुकी होती.

परन्तु तात्कालिक राजनेताओ में दूरदृष्टि का अभाव, अर्थव्यवस्था को साधने के कौशल का ना होना, और राष्ट्रहित के स्थान पर व्यक्तिगत हितो को ऊपर रखने की मानसिक बीमारी के चलते यह सुनहरा अवसर हाथ से निकल गया.

वर्तमान समय में ऋण के चक्रव्यूह में उलझना हितकारी नहीं है इससे राष्ट्र के टूटने तक का आतंरिक और बाहरी खतरा उत्पन्न हो सकता है. अभी यह खतरा कुछ छोटे देशो पर मंडरा रहा है पर शीघ्र ही ऐसा विकसित देशो के साथ भी हो सकता है, और तब ऐसे देश विघटन का दंश झेलेंगे, अपनी प्रतिष्ठा खो देंगे, बेकारी, महंगाई, अभाव आदि से उपजे गृह युद्ध के पहले चरण में धकेल दिए जायेंगे, राजनितिक नेतृत्व अप्रासंगिक बन जायेगा. ऐसा होते देखना कोई भी देश, जनता और राजनैतिक नेतृत्व नहीं चाहेगा.

उपलब्ध विकल्पों में से सर्वोत्तम विकल्प है सांस्कृतिक और सामाजिक नवचेतना का पुनर्जागरण करना. आर्थिक विकास इसका मात्र एक प्रतिफल होता है, विराट उद्देश्य तो विश्व को नया नेतृत्व तथा राह प्रदान करना है ताकि भारत विश्व गुरु के रूप में सदियों तक सकल विश्व पर राज कर सके.
यदि आप संवेदनशील है, अपनी आँखे खुली रखते है, और किसी भी पूर्वाग्रह से मुक्त है तो आप जान सकेंगे कि भारत का वर्तमान नेतृत्व इसी दिशा में अपनी सम्पूर्ण शक्ति से अविरल कार्यरत है.

जातिवाद, कट्टर इस्लाम, भ्रष्टाचार, विपन्नता, और इंजीलवाद हमारी राह के रोड़े है, भारत देश की स्वर्ण धरा पर ऐसी खरपतवार को उखाड फेंके बिना राष्ट्र और हिन्दू चेतना के नवजागरण का यह महायज्ञ संपन्न नहीं हो सकेगा.

हम सभी को यथाशक्ति इस हेतु योगदान करने के लिए तत्पर और समर्थ रहना होगा.
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आलेख सन्दर्भ-
1- ब्रिटेन को पछाड़ कर भारत 2022 में विश्व की पांचवी बड़ी आर्थिक महाशक्ति बना.
2- सफल मोदिनोमिक्स.

12 August 2022

रक्षाबंधन

प्रतिवर्ष श्रावणी-पूर्णिमा को रक्षाबंधन का त्यौहार होता है,  इस दिन बहनें अपने भाई को रक्षा-सूत्र बांधती हैं।  यह रक्षा सूत्र यदि वैदिक रीति से बनाई जाए तो शास्त्रों में उसका बड़ा महत्व है।





वैदिक रक्षा सूत्र बनाने की विधि :-.

इसके लिए ५ वस्तुओं की आवश्यकता होती है, (१) दूर्वा (घास), (२) अक्षत (चावल), (३) केसर, (४) चन्दन, (५) सरसों के दाने।


इन ५ वस्तुओं को रेशम के कपड़े में लेकर उसे बांध दें या सिलाई कर दें, फिर उसे कलावा में पिरो दें, इस प्रकार वैदिक राखी तैयार हो जाएगी।


इन पांच वस्तुओं का महत्त्व:-

(१) दूर्वा - जिस प्रकार दूर्वा का एक अंकुर बो देने पर तेज़ी से फैलता है और हज़ारों की संख्या में उग जाता है, उसी प्रकार मेरे भाई का वंश और उसमे सदगुणों का विकास तेज़ी से हो। सदाचार, मन की पवित्रता तीव्रता से बदती रहें। दूर्वा गणेश जी को प्रिय है अर्थात हम जिसे राखी बाँध रहे हैं, उनके जीवन में विघ्नों का नाश हो जाए।

(२) अक्षत - हमारी प्रभु के प्रति श्रद्धा कभी क्षत-विक्षत ना हो सदा अक्षत रहे।

(३) केसर - केसर की प्रकृति तेज़ होती है अर्थात हम जिसे राखी बाँध रहे हैं, वह तेजस्वी हो। उसके जीवन में आध्यात्मिकता का तेज, भक्ति का तेज कभी कम ना हो।

(४) चन्दन - चन्दन की प्रकृति शीतल होती है और यह सुगंध देता है। उसी प्रकार उसके जीवन में शीतलता बनी रहे, कभी मानसिक तनाव ना हो। साथ ही उनके जीवन में परोपकार, सदाचार और संयम की सुगंध फैलती रहे।

(५) सरसों के दाने - सरसों की प्रकृति तीक्ष्ण होती है अर्थात इससे यह संकेत मिलता है कि समाज के दुर्गुणों को, कंटकों को समाप्त करने में हम तीक्ष्ण बनें।


इस प्रकार इन पांच वस्तुओं से बनी हुई एक राखी को सर्वप्रथम प्रभु को अर्पित करें। फिर बहनें अपने भाई को, माता अपने बच्चों को, दादी अपने पोते को शुभ संकल्प करके बांधे।

महाभारत में यह रक्षा सूत्र माता कुंती ने अपने पोते अभिमन्यु को बाँधी थी। जब तक यह धागा अभिमन्यु के हाथ में था तब तक उसकी रक्षा हुई, धागा टूटने पर अभिमन्यु की मृत्यु हुई।

इस प्रकार इन पांच वस्तुओं से बनी हुई वैदिक राखी को शास्त्रोक्त नियमानुसार बांधते समय ये श्लोक बोलें

येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबलः ।

तेन त्वाम रक्ष बध्नामि, रक्षे माचल माचल:


शुभ रक्षाबंधन

12 June 2022

Chef's Day In The Kitchen




हम स्वयं:- जीरा जले, जां जले...

पत्नी:- ओssहो

हम स्वयं:- परदेसी परदेसी, जमा दही...
पत्नी:- बस...

हम स्वयं:- ये जो हल्का-हल्का मसूर है...
पत्नी:- जाती हूँ मैं...
हम स्वयं:- (बेलन से बचते हुए) हल्दी है क्या...
★पत्नी गयी√
हम स्वयं:- घिये किसते है, आलू छिलते है
बड़ी मुश्किल से मगर, रसोई में कोफ्ते बनते है...

[ ओsss गीले सालन के तले, चूल्हे की आँच जले...ऐसे ही कुकर में आती है सीटी, ऐसे ही दाल पके...]

हम स्वयं:- हींग इस किंग, हींग इस किंग...
[ छोंका लगाss, हाय लगा...]

पत्नी:- (वापस आकर) तुम इतना जो पका रहे हो, क्या जल गया है जिसे छुपा रहे हो...
हम स्वयं:- (मसला देखते हुए..) हमे तुमसे प्याज़ कितना...
पत्नी:- तू प्याज़ है किसी और का, तुझे काटता वही और है...
हम स्वयं:- हमss तिल दे चुके सनम...
पत्नी:- सनम तेरी रसम...सनम तेरी रसम...

[ दो दीवाने शहर में, तुअर में और अरहर में, साबूदाना ढूंढते है...]

हम स्वयं:- तेरी भिंडियाँ रे, आ खाये तेरी भिंडियाँ रे...
पत्नी:- खाओगे जब तुम राजमा, मुँह में लड्डू फूटेंगे...
बरसेगा माखन झूम-झूम के, जब तुम घुइयां चखोगे...
हम स्वयं:- चख घुइयां घुइयां घुइयां घुइयां...चख घुइयां घुइयां घुइयां घुइयां...
पत्नी:- खाओ हुज़ूर तुमको सितारों में ले चलूं......

【°बैकग्राउंड म्यूजिक°--
¶ नोन मिरच सब चीनी रे, तोरे नैना मलाई के, नैना मलाई के, नैना मलाई के....】

Disclaimer:-
I'm an actual Chef who is not actually a Chef.
My specialisty is 'Musing Rice'.

winners NEVER quit and quitters NEVER win. Really...?


 ➖ winners NEVER quit and quitters NEVER win ➖

[This statement is Half Truth & Partially False]
The Reality is that sometimes...
Winners do also Quit and quitters also Win.

🔸 जहाँ पर पाश्चात्य चिंतन और दर्शन समाप्त हो जाता है, उससे ऊपर भारतीय चिंतन और दर्शन के वास्तविक स्वरुप का प्रारम्भ होता है.

▪️1974 में वाटरगेट कांड के कारण महाभियोग का अपयश झेलने और राष्ट्रपति के पद से त्यागपत्र देने के उपरांत रिचर्ड निक्सन ने अपनी आत्मकथा में ग्रीक दर्शन से प्रेरित एक वाक्य लिखा था... "A man is not finished when he is defeated. He is finished when he quits."

उन्होंने अंतिम समय तक लड़ने वाले को असली योद्धा माना.
पर क्या यह सही है?
अनुपयोगी, अवश्यम्भावी हानिकारक या अहंसिद्धि की लड़ाई लड़ने या जीतने का कोई लाभ नहीं होता, इसे छोड़ देना ही श्रेयस्कर है.

🔸 भारतीय दर्शन में रणछोड़ या Quitter को भी सम्मान प्राप्त है. रणछोड़ भगवान श्रीकृष्ण का एक नाम है.
पौराणिक कथा के अनुसार जरासंध ने अजेय राक्षस कालयवन के साथ मिलकर भगवान श्रीकृष्ण की मथुरा पर आक्रमण कर दिया था, तब युद्ध से बचने के लिए श्रीकृष्ण जी मथुरा छोड़कर भाग गए थे.

परन्तु बात यहाँ समाप्त नहीं होती है, उन्होंने Quit/Escape तो कर दिया था पर ऐसी परिस्थिति निर्मित कर दी थी कि कालयवन राक्षस इक्ष्वाकु नरेश मांधाता के पुत्र और दक्षिण कोसल के राजा मुचकुंद के द्वारा मारा गया था. उनके लिए स्वयं quit करके भी वांछित कार्य का सफल निष्पादन ज्यादा महत्वपूर्ण था. यहाँ 'कार्य बड़ा, कर्ता छोटा' ध्येय है.
इसके बाद कृष्ण जी ने जरासंध के आक्रमणों से बचने के लिए मथुरा को सदा के लिए छोड़ दिया और सुदूर पश्चिम में समुद्र तट पर द्वारका नगरी का निर्माण किया. यहाँ 'संभावित विपत्तियों को टालने के लिए Quit करना श्रेयस्कर समझा गया ताकि कार्यसिद्धि में रुकावट न आये.

यहाँ इस बात को समझना आवश्यक है कि हर काम स्वयं भगवन भी नहीं करते पर हो सकता है किसी अन्य व्यक्ति द्वारा उस काम को करवा दे, जैसे कालयवन को स्वयं भगवान नहीं मार सकते थे पर राजा मुचकुन्द से उसे मरवा दिया. पर खुद रणछोड़ कहलाये और मथुरा को छोड़ सदा के लिए पलायन कर गए.

🔹 वैश्विक मंच पर Executive Coaching के क्षेत्र में लम्बे समय से यह धारणा बनी रही कि 'Not all people and executives are coachable'.
हर एक व्यक्ति या अधिकारी को नेतृत्व देने या कार्यसिद्धि के लिए सिखाया-पढ़ाया नहीं जा सकता, परन्तु ऐसे लोगो से हर समय सीखते रहने और प्रयास करते रहने की अपेक्षा तो की जाती रही क्योकि उनके द्वारा किसी कार्य को छोड़कर भागना उचित नहीं समझा जाता था.
ऐसे लोगो को जो सीखने की प्रक्रिया में पीछे रह जाते है या उसे छोड़कर चले जाते है उन्हें प्रबंधन द्वारा नाकारा, अयोग्य या अनुपयोगी मान लिया जाता है. इसलिए उन्मुक्त बाजारवादी अर्थव्यवस्था में Quitters अनुत्पादक और निष्फल कर्मचारियों की श्रेणी में रखे जाते है. यह विशेषण उस व्यक्ति के व्यावसायिक जीवन को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है.

🔹 परन्तु एक Leadership Coach के रूप में (प्रचलित धारणाओं के विपरीत) मेरा मानना है कि...
'Every one is Coachable by one or SOME other Coach'.
हर व्यक्ति को विकसित किया जा सकता है, यदि एक व्यवस्था में वह पीछे है तो संभव है किसी अन्य व्यवस्था में वह आगे आ जाये और अपना ज्यादा अच्छा और प्रभावी योगदान दे पाए.

एक प्रशिक्षक या Coach से सीखने में अक्षम रहने वाला कर्मचारी किसी अन्य प्रशिक्षक या Coach के सानिध्य में वही या कोई अन्य विधा सीखकर उसमें योग्यता प्राप्त कर सकता है.

मेरा मानना है कि बिना किसी विशेष उत्पादकता के उसी कार्य में लगे रहना अनुचित और अनपेक्षित है, ऐसी परिस्तिथियों में Quit करना/करवाना अनुचित नहीं है.
यदि वह कार्य बहुत आवश्यक है तो वर्तमान व्यवस्था या कर्मचारी को हटाकर किसी नयी व्यवस्था या कर्मचारी को उस कार्य में लगाना ज्यादा उचित है.
इससे भी ज्यादा उचित होगा की वह व्यक्ति स्वय उस व्यवस्था या कार्य से अपने आप को अलग कर ले, Quit कर दे और अपने से ज्यादा उपर्युक्त व्यवस्था या व्यक्ति को वह कार्य करने दे और स्वयं अपने योग्य व्यवस्था और कार्य में सलंग्न हो जाये.

मेरा यह सिद्धान्त भविष्य में Exexutive Coaching की एक नई शाखा की उत्पत्ति का कारक होगा, जहां अयोग्य या अनुत्पादक कर्मचारियों को उनके योग्य कार्य मे पुनर्स्थापित करने का सक्षम प्रयास हो सकेगा.

"A man is not finished when he is defeated. He is finished when he quits." की अपेक्षा एक अनुपयोगी कार्य को छोड़कर किसी अन्य उपयोगी कार्य को करना एक ज्यादा सही निर्णय है. और यह अंत नहीं बल्कि शुभारम्भ है.

रणछोड़ (Quitter's) मानसिकता या बुद्धिमता विकसित करने में भारतीय दर्शन वर्तमान पाश्चत्य दर्शन और ज्ञान से बहुत आगे है.
पश्चिम को इस ज्ञान को सीखना ही होगा, भारत और उसके मनीषी, Executive Coaches विश्व को यह ज्ञान देने व सिखाने के लिए तत्पर है, इच्क्षुक है, और प्रस्तुत भी है.

Now the time has come when Intellectually confused and stagnant west should start learning from Indian Coaches.
Indian modern Coaching system has evolved further and now commands the podium position.

24 September 2021

करवा चौथ

पति-पत्नी के मध्य वैवाहिक प्रतिबद्धता, परस्पर उत्तरदायित्व, विशेषाधिकारो
एवं मान-सम्मान का वार्षिक नवीनीकरण


क्वांटम भौतिकी के एक सिद्धांतानुसार युग्मित इलेक्ट्रान एक जैसी प्रतिक्रिया देते है चाहे इनके बीच हज़ारो किलोमीटर की दूरी ही क्यों न हो. इनको प्रथक करना संभव नही होता.

★यही युग्मन पति-पत्नि के मध्य बनाने के लिए करवा चौथ के व्रत का प्रावधान है.

करवा चौथ सिर्फ पूजा पाठ नही है बल्कि यह एक बहुत उच्चकोटि का विज्ञान है जिसमे प्रकृति प्रदत्त शक्तियों का अपने सांसारिक हितो के लिए उपयोग करने का जटिल ज्ञान और विधि समाहित है जिसमे यम से अपने मृत पति को वापस प्राप्त करने की शक्ति भी है.

करवा चौथ का व्रत महिलाओ ले लिये रक्त शुद्धिकरण, अंतःस्राव नियमतिकरण, शक्ति (ऊर्जा) संचरण को प्राप्त करने का सर्वोत्तम साधन है. इसमें शिव-पार्वती की पूजा उपासना करके चंद्रमा को जल का अर्ध्य देकर निर्जला व्रत पूर्ण किया जाता है.

शिव पार्वती (अर्धनारीश्वर) पति पत्नी के एकाकार होने का प्रतीक और माध्यम है. निर्जला व्रत रक्त शुध्दि, चंद्रमा अंतःस्राव का नियमतिकरण और जल का अर्ध्य ऊर्जा संचरण के लिये है.

🔸करवा चौथ व्रत में पति-पत्नी के मध्य कई विशेष गुण जैसे अटूट आपसी प्रेम, सत्यनिष्ठा, निस्वार्थता, सहनशीलता, विश्वास और एक दूसरे के प्रति ढेर सारी कृतज्ञता समावेशित है🔸

🌹 विवाहित युगल की सप्तपदी से प्रारंभ हुई जीवन यात्रा उपरोक्त वर्णित गुणों से सरोबार होकर जब करवा चौथ व्रत को प्राप्त होती है तब युगल एक 'युग्म' हो जाता है, और तब उन्हें प्रथक करना असंभव होता है.

चूँकि महिला देह चंद्रमा से ज्यादा प्रभावित होती है इसीलिये व्रत पत्नी करती है और सहयोग पति परमेश्वर का होता है.


करवा चौथ सिर्फ एक दिन का व्रत नही है यह पति पत्नी के मध्य व्यतीत किये गए प्रतिदिन के जीवन और इसके विशिष्ट गुण-धर्म के निर्वाह की परिणिति है.

➖ "विवाहित युगल को अपृथकीय युग्म में बदलने हेतु करवा चौथ का व्रत होता है" ➖


- हर्ष कुमार लाल
(यह लेख विज्ञानं सम्मत एवं वैदिक ज्ञान की अनुभूति पर आधारित है जो सत्य है )

Technological Disruption

Failed USA model of 'Technological Disruption' is the main idea behind naming 'Mangal Teeka' Covid Vaccine as BJP Vaccine.


This is much more dangerous than it seems.


Unlike most countries all new inventions in the USA are assigned to some political party.
For example:- [In transportation and energy sector]...
Anything to do with petroleum, natural gas, biofuels, clean diesel, hydrogen and any means of producing electricity other than wind turbines or solar panels are 'Republican' technologies.
Hybrids, plug-ins and battery-electric vehicles are Democrat technologies, in addition to anything related to solar and wind energy.
The kind of innovations that build new industries are dying in USA.
Actually, these are being murdered.
Technologies are political power game in USA thus they are not able to generate new jobs in required and sufficient quantity.
And this political corruption is forcing USA administration to draw many policies which are not world friendly in general and India friendly in particular.
Congress led UPA government of India ignored these facts and completely surrendered to USA, whereas Modi govt negotiates hard to encash weaknesses of USA to benefit India.
This was completely evident in pre 2014 era during Nuclear Deal, Headley confession regarding his role in Mumbai attack and India's inability to use his confession as a proof in Indian court, offshore BPO jobs, Patent of Intellectual properties and many more....
In this changing times China is vowing to be a leader in industrial and other technologies, and Japan, Europe and Brazil are coming strongly in many core areas.
Here India can’t afford to look that stupid and lose such god sent opportunities.
We shall not forget and forgive Congress led UPA government for their inability and habit to sabotage India and it's citizen.
Now these forces are trying to mimic the same nefarious design to tag Indian Covid Vaccine as BJP technology and polarizing the society on technological ground.
This will lead to the same consequences as USA has faced and this ultimately will help China and other facultative nations to take lead and cash upon India's weakness to widen the gap in economy beyond repair.
On the other hand success of Indian vaccination and many other programs will lead to various 'silent innovations' and propel Indian economy to the greater heights making India a true world power.
Hope devil's design of anti India forces is well understood and then rejected by their own supporters also.

The Hu-Line of China

-An Imaginary Demographic Divide-

(Also known as Heihe-Tengchong Line or Aihui-Tengchong Line)



This 3,750 km long diagonal line bisects China into two unequal halves - West and East.
Hu-Line is not present on the map or land of China but otherwise it exists significantly.
It is as invisible as it is imaginary.
Yet Hu-Line is as relevant as when it was first imagined and hand drawn in 1935 to point out unequal geographical distribution of China's population.
▫️West of the Hu-Line is comprised of 64% of China's territory but contained only 4% of the China's population.
Inversely, 96% of the Chinese lived in the East of this 'geo demographic demarcation line' on just 36% of the land.
▫️Since 1935 population of China has tripled from 50 crores to 145 crores but still 6% of the China's population lives on 57% of the territory on the west of Hu-Line and 94% of the population lives on 43% of the territory on the east of Hu-Line.
▫️Ethically 92% of Chinese are Han and lives in East of Hu-Line. Rest of the 8% that make up China's ethnic minorities lives in west of the Hu-Line.
▫️This is notably the case in Tibet and Xinjiang, two nominally autonomous regions with non-Han ethnic majorities.
▫️


Currently these two province are mounting strong resistance and opposition to mainland China.
▫️East of Hu-Line is virtually all the infrastructure and economy of China as land is flatter and wetter there.
On the west of Hu-Line terrain is plateaus, mountains and deserts and climate is tough.
▫️In 1999 Jiang Zemin, the then Secretary General of CPC, launched 'Develop the West' campaign.
This has an interesting economic angle of infrastructure and industrial development.
▫️This long term policy of 'Develop the West' has resulted in huge migration of Han ethnic majority group from east to west of Hu-Line.
【Now China's ethnic majorities of West are under threat of becoming minorities in their own regions.】
▫️Hu-Line is fading as West ethnic diversity is being sacrificed with economic progress.
◾Han Dragon is slowly engulfing the West of Hu-Line.
Real China is mainland China with Han ethnic majority population. It means 43% land and 94% population is Chinese. 57% Chinese land is occupied and 6% population of China is oppressed.
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